Wednesday, February 9, 2022

हम कौन सा धर्म निभा रहे हैं

 


आप इस बात की शुरुवात जहां से भी करो मुड़कर वही आनी है जहां इसकी जड़ है या असल है ।
सच हमेशा सच रहेगा । आप जितना भी तोडमडोड कर उसे झूट साबित करना चाहो नही होगा । कभी कभी कोई एक जगहों पे ऐसी कोई मिसाल दिखती हैं के बात यानी असल बात कुछ और होता है और दुनिया के सामने कुछ और दिखाया जाता है । वक्त बदलता है और चीजें फिर खुलके सामने आती है और हकीकत अपनी जगह लेलेती है । 

मेरा दोस्त अक्सर इस बातपे बहस करता है और बार बार दोहराता है के सारे फसाद की जड़ मुसलमान हैं । यानी दुनियामे जो खून खराबा है या दहशत का माहौल है सब मुसलमानो की वजह से है । मैं उसे हर बार यही कहता हूं के जो तुम्हे या और लोगोंको दिखाई दे रहा है वो सच नहीं है जो दिखाया जा रहा है । मगर वो नही मानता । मैं उसके साथ जबरदस्ती नहीं कर सकता या उसे किसी तरह मेरे बात से सहमत नही करा सकता क्योंकि उसकी अपनी समझ है लेकिन मैं उसे इस बातकी तरफ लानेकी हमेशा कोशिश करता हूं की वो लोगोंको या मुसलमानोको न देखें जो उसे दिखाई दे रहा है या जो उसे दिखाया जा रहा है । मैं उसे इस बातपे कायल करना चाहता हूं की मैं और वो किस तरह समाज में फैले हुए इस नफरत को मिटा सकते हैं या लोगोंके सोंच या नजरिए को बदलने की कोशिश कर सकते हैं । दुनियामें कोई एक रायको कायम और आम होने में बहोत सारा वक्त लगता है । और जो बरवक्त माहौल है उसे इस हाल तक पहुंचने में जाने कई साल या सदी लगे होंगे । 
क्या सचमे मुसलमान ही फसाद की जड़ है ?


दुनियामे इंसान दो तरहके होते हैं अच्छे और बुरे ।
अच्छाई और भलाई के काम करने वाला अच्छा इंसान और बुराई के काम करने वाला बुरा इंसान । अगर हमें दुनियासे नफरत और बुराई खतम करना है तो हमे दुनियामे अच्छाईकी बोहतात करनी होगी यानी हर जगह अच्छे काम करके दिखाने होंगे । हम एक कौम/मजहब को जिम्मेदार ठहराकर अपनी कमजोरिको नही छुपा सकते । अगर दुनियामे बुराई और फसाद की जड़ मुसलमान हैं तो दूसरे लोग कया कर रहे थे जब बुरा हो रहा था ? क्या अच्छाई इतनी कमजोर पड़ गई दूसरी क़ौमके लोगोंके पास के उस अच्छाई से बुराईको रोक नही सके ? 
ये एक सवाल है हर मजहब के सामने है जो ये दावा करते हैं के मैं और मेरी कौम सच्चे और अच्छे हैं ।


अगर चे वे अच्छे हैं तो कहां हैं उनकी अच्छाई जो लोगोंके दिलों में बैठे गंदको मिटा न सकी ? 
दुसारोंको बुरा कहने से पहले हमे ये देखना होगा के हम कहां कहां बुरे हैं । हमसे कोई नफरत इसलिए करता है के वो हमारी किसी बात से असहमत होता है या उसे हमारे किसी काम से नुकसान पहुंचता है । क्योंकि जो आप महसूस करते हैं हर एक इंसानके साथ वही एहसास होता है । अगर हम किसीको प्रेम करते हैं करुणा, दया और सम्मानसे तो वो भी हमे उसी प्रकार स्नेह करता है, हमारी इज्जत करता है और हमारी भावनाओ का सम्मान करता है । यानी बात ये तय हुआ के जैसा हम करेंगे प्रतिफल वैसा ही मिलेगा ।
तो हमे ये करना चाहिए की किसीपे लांछन लगाने के बजाय हम उन त्रुटियों को ढूंढकर उन्हे ठीक करें और समाज और देशको ये संदेश दें के सिर्फ बुरा कहने से बुराई खतम नही होगा हमे अच्छे काम भी करने होंगे । 
दुनिया में जितने भले लोग गुजरे उन्होंने किसीको बुरा नही कहा बल्कि खुदभी अच्छे काम किए और लोगोंको भी अच्छे कामकी नसीहत की । मैं नहीं कहता हर चीज एकदम से बदल जाएगा मगर हमारी पहली और आखरी कोशिश ये हो के हम खुद अच्छे काम करें और अच्छे कामकी नसीहत करें । और जो बुरे काम करने वाले लोग हैं कब तक बुराइमे लगे रहेंगे । जब हर कोई अच्छाई और भलाई की बात करने लगेगा तो बुराइका पतन स्वतः होजाएगा ।


बुराई की सबसे पहली कारण स्वार्थ है और जबतक दुनियामे स्वार्थी लोग होते रहेंगे हर तरह का फसाद जनम लेता रहेगा ।
जब अरबमे हर जगह फसाद, लूट और कत्ल आम होगया था और लोग सिर्फ ताक़तपे यकीन रखते थे और इसी बलपे जीते भी थे । उनके लिए नैतिक मूल्य और मान्यताएं सिर्फ एक बात रह गई थी तब अल्लाहने हजरत मोहम्मद ( सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ) को नबी बनाकर भेजा और सिर्फ 23 सालमे आपने सिर्फ अरब नही पूरी दुनियाको जिनेका तौर तरीक़ा सीखा दिया । दुनियाकों तालीम दी की व्यक्तिगत जीवनके क्या नैतिक कर्तव्य हैं और सामाजिक जीवनके क्या आधार हैं । आपने सिखाया व्यक्तिगत हित से ऊपर है सामाजिक हित । आपने बताया परोपकार ही धर्म है । जो भी धार्मिक होगा वो परोपकारी होगा । निस्वार्थ होगा और उसके मनमे सभी केलिए आदर और सम्मान होगा ।

महात्मा गौतम बुद्ध ने क्यों राजगद्दी छोडी ? क्योंकि उन्होंने समाज में विभेद देखा । असमानताएं देखी जो लोगोंको दुखी कर रही थी । उन्होंने सन्यास लिया और पता किया के हर दुख और चिंता का कारण स्वार्थ है । लोगों में त्याग खत्म होगया है और सिर्फ मैं कि भावना बाकी है । उन्होंने लोगोंको अध्यात्मकी तरफ बुलाया और मोह,माया और लालच से छुटकारा दिलाकर समाजमें सुख, शांति और समृद्धि कायम कर दिया ।

महाभारत क्यों हमारे लिए मार्ग दर्शन नही बन रहा है ? 
क्योंकि आज हम अपना धर्म भूल गए । आज लोग सिर्फ दिखावा करते हैं । तरह तरह के भेष धारण करते हैं और दूसरों के खिलाफ नफरत की बात करते हैं । मारने और खत्म करने की बात करते हैं ।
हम कौन सा धर्म पालन कर रहे हैं ?

" हमे याद रखना चाहिए हम किसी भी धर्मके अनुयायी होने से पहले एक इंसान हैं और हमारा पहला और अंतिम धर्म सिर्फ इंसानियत है ।"

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