हमें क्या करना चाहिए ?
मेरा दोस्त परेशान हालमें कहीं से आया और एक ग्लास पानीकी तलब की । मैंने उसे बैठने को कहा और पानी लेने चला गया । पानी के साथ कमरेमे दाखिल होते ही मेरे दोस्त ने मुझसे सवाल किया, " हम कहां खड़े हैं " ? मैंने उसे पानी पकड़ाई और थोड़ा सा थमके मजाहिया अंदाज़मे जवाब दिया । हम खड़े कहां हैं, हम तो बैठे हुए हैं । वो झुंझलाते हुए बोला " मेरा मतलब ये नही कुछ और है । मैं पूछ रहा हूं, लोगों को क्या हुआ है ? उसने दूसरा सवाल किया ।मैं उसके चेहरे पे बनती बिगड़ती लकीरों को देखकर उसकी परेशानी की सबब पूछता उससे पहले उसने एक और सवाल किया " लोग अपने काम से काम नहीं रख सकते " ?
मैंने कहा पहले पानी पियो और थोड़ा सुकून की सांस लो फिर हम जो भी परेशानी है उसपे बात करेंगे । मैंने पंखे का बटन दबाया और एक तकिया उसकी तरफ बढ़ाते हुए रिलैक्स करने को कहकर कमरे से बाहर निकल आया । मैं फिर सोचने लगा कि क्या हुआ है के एक पुरसुकून और खुशमिजाज शख्स इतना परेशान है ?
मैंने जब उसके सवालोंपे गौर किया तो मेरे जेहन में कई तरहके जवाब दौड़ने लगे । मैं कुछ देर और सोचता रहा फिर तय किया के बेहतर होगा अगर हम तहम्मूल और इतमिनानसे इस मौजू पर बात करें और सवालोंके पसमंजारका जायजा लें । जरूरी है किसी सवालके जवाब देने से पहले खूब अच्छी तरह सवाल समझ लिया जाए । उसके सवाल मामूली से लगते हैं मगर उसके पूछनेका अंदाज सादा और मामूली नही हैं ।
मैं जब दुबारा अंदर कमरेमें दाखिल हुआ तो मेरे दोस्त ने वही सवाल फिर दोहराया " हम कहां खड़े हैं ?
मैंने पूछा बात क्या है ? उसने कहा आजकल लोगों में सब्र बाकी नही रहा । लोग छोटी छोटी बातों पे लड़ रहे हैं । दरगुजर करना और माफ करना तो जैसे कोई चीज ही नहीं रहा । जहां लोग भाईचारा और मोहब्बत की बात करते थे आज लोग नफरत और हिकारतसे एक दुसरेको देखते हैं । सदियोंसे एक साथ रहने वाले लोग आज बेगाने नजर आते हैं ।
मैं चुपचाप उसकी बातें सुन रहा था ।
उसने बात जारी रखते हुए बोला, तुम्ही बताओ अगर कहीं दूर शहरमे किसीका सामान चोरी होजाए तो क्या तुम अपने पड़ोसीको इसका जिम्मेदार बता सकते हो ? मैंने कहा "बिलकुल नहीं " । ये तो सरासर मूर्खता है ।
ये तो एक बात है मैं तुम्हे दूसरी बात बताता हूं, मेरे दोस्त ने कहा ।
मैं ध्यानसे उसकी बातें सुन रहा था । उसने पूछा, क्या शक के बुनियादपे किसीको सजा देना ठीक है ? मैंने कहा "बिलकुल भी नही" । हां, अगर शक है तो पूछताछ कर सकते हैं । किसी ठोस सबूतके बिना किसी नतीजे पर पहुंचना अच्छा नहीं है ।
उसने कहा, आजकल समाजमे हक़ीक़तको छुपाकर लोगोंके दिमाग़में एक दुसरेके खिलाफ नफरत भर दिया गया है । लोगोंको बेरोजगार करके उन्हे मजहबके नाम पर उकसाया जा रहा है । क्योंकि कुछ लोग इस बातको अच्छी तरह जानते हैं की लोग काममें रहेंगे तो उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं होगा और नफरतका बाजार नही चलेगा । इसलिए एक संयोजित योजना के तहत युवाओंसे नौकरियां छीनी गईं और फिर छोटे व्यापारियोंके व्यापार बंद कराए गए । आज लोगोंके पास न कोई काम है न पैसा । तो करें तो क्या करें ?
तुम्हारे कहनेका मकसद क्या है ? मैंने पूछा ।
मेरा दोस्त कहने लगा इस महंगाईके दौरमे जहां जिंदगी गुजारना दुश्वार हो रहा है वहीं चंद लोग नफ़रतका बाजार गर्म करके जीना मुहाल कर रहे हैं ।
लोगोंको शिक्षा, स्वस्थ, रोजगार और देस विकासके मुद्देसे भटका कर धर्म और जातपातकी अनावश्यक तथ्योमें उलझा रहे हैं । इतिहासके सुनहरे पन्ने जहां समृद्धि, भाईचारा और सहिष्णुताके सर्वोत्कृष्ट गाथाएं दर्ज हैं उन्हें मिटानेकी दिनरात कोशिश की जा रही है । विज्ञान और प्रविधिके इस दौरमे लोगोंको झूठे तथ्य बताकर गुमराह किया जा रहा हैं । और लोग सच और झुठके इस शर्मनाक और घिनौनी खेलका पर्दाफाश करने के बजाय अंधभक्त होकर अंधाधुंध दौड़ रहे हैं ।
लोगोंको क्या होगया है ? हम कहां खड़े हैं और कहां जा रहे हैं ?
मैंने मेरे दोस्तके बातों पे सहमति जताई और कहा कि हमे बीते हुए कल की तरफ देखने के बजाय हमें आगे देखना होगा । विद्यमान परिस्थितिमें जो भी हमारे सामूहिक मुद्दे हैं (जैसे: शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास) उनसे जुड़ी जितनी भी समस्याएं हैं उन्हें एकताबद्ध होकर हल करने होंगे ।
अगर हम गड़े मुर्दे उखाड़ेंगे तो सिर्फ कंकाल ही हाथ लगेंगे जो व्यर्थ है । धर्म, व्यक्तिगत अनुसाशन और व्यक्तित्व विकासकी एक पद्धति है जो इंसानको भद्र, मर्यादित, सहज और अनुशासित बनाता है ।
हमें सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वोंसे सावधान रहना होगा ।
हमें कदापि उन मुद्दों और बातोंकी तरफ ध्यान नहीं देना चाहिए जो हमारे जज्बातको भड़काते हों और हमें भटकाते हों मौलिक आवश्यकताओं और समसामयिक मुद्दोंसे तथा हमे अराजक होने केलिए उत्प्रेरित करते हों ।
हमें इस बातको खूब अच्छी तरह समझना होगा कि धर्म इंसानको सबसे पहले सेवा करना सिखाता है । भाईचारा सिखाता है और एक दुसरेका सम्मान करना सिखाता है । लोग जो कह रहे हैं के हमें इनसे या उनसे खतरा है । हमें किसीसे कोई खतरा नहीं है । खतरा उनसे है जो ये दुष्प्रचार कर रहे हैं कि हमें इनसे या उनसे खतरा है । हमें ऐसे लोगोंसे दूर रहना चाहिए ।


0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home