Wednesday, February 16, 2022

हिजाबपे बवाल, क्यों ? क्या सचमें हिजाब देस केलिए खतरा है ?

क्या सचमें हिजाब देस केलिए खतरा है ?


व्यवहारिक तौरपे देखा जाए तो आपको और मुझे जो पसंदीदा लिबास होता है वो हम और आप पहनते हैं । लोग कपड़ा तन ढकने और खूबसूरत लगने केलिए पहनते हैं । आजके दौरमें जहां हरकोई चुस्त और दुरुस्त रहना चाहता है, ऐसे में सबसे ज्यादा भूमिका कपड़ेका चुनावका होता है ।

कोई शर्ट पैंट पहनता है तो कोई कुर्ता पायजामा या कोई धोती कुर्ता । लड़कियों और औरतों केलिए साड़ी, कुर्ती सलवार, टी-शर्ट और जींस जैसे कपड़े आम तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं । लोग अपने मिजाज़, पसंद और अवसर अनुसार कपड़े पहनते हैं । भारतमे हमेशासे औरतें ऐसे कपड़े पहनती हैं जो उन्हें खूबसूरत बनाता है और साथ साथ उन्हें जो सुरक्षित लगता है। साड़ी जो सारा बदन ढकता है, पुराने समयसे अब तक चलता आ रहा है । लड़कियां कुर्ती सलवार भी दुपट्टाके साथ इस्तेमाल करती हैं ।




लड़कियोंके कपड़ेके के सवालमे हमेशासे मतभेद रहा है । देशमें जब लड़कियोके साथ बलात्कार और झेड़खानीके वारदात बढ़ने लगे तो लोगोंने कहा के आजकलकी लड़कियां मॉडर्न कपड़े ( टी-शर्ट, जींस और स्कर्ट ) पहनती हैं तो ये हादसे हो रहे है। लड़कियोंको चाहिए के वें ऐसे कपड़े पहने जो जिस्मके उत्तेजनात्मक हिस्सोंको छुपा सकें ।




आज इक्कीसवीं सदीमे औरते अपने हक़ और अधिकारके लिए पूरी दुनियांमें मोर्चे खोलकर बैठी हुई हैं । 

कौन क्या कपड़े पहने ये कभी डिबेटका मुद्दा ही नहीं रहा मगर तंग नजर लोग जो पराई औरतको बरहना(नंगा) देखना चाहते हैं हमेशा कोई न कोई बहाना बनाकर औरतोंको परेशान करते रहते हैं

"जब लड़कियां देसमें सुरक्षित नहीं रहीं, बलात्कार और छेड़खानी हदसे ज्यादा बढ़ने लगीं तो खुदको परदेमे क़ैद करने लगीं । मुसलमान औरतें और लड़कियां जिस तरह हिजाब या नकाबका इस्तेमाल करती थीं गैर मुस्लिम महिलाएं भी इसे अपनाने लगीं । भले और संस्कारी परिवारकी महिलाओं केलिए हिजाब एक सुरक्षा कवच बना और देसमें आमतौर पर इस्तेमाल होने लगा ।" 

इसका असर ये हुआ के जो वहशी और गंदे सोंचके घिनौने लोग थे उनके इरादे पस्त होने लगें । वे लोग बहाने ढूंढने लगे क्या हरकत किया जाए जिससे "सांप भी मरे और लाठी भी न टूटे" । जिन लोगोंका काम ही बुरा करना होगा वो सिर्फ बुरा ही सोचेंगे और बुरा ही करेंगे ।



आजकल पूरे देशमेें हिजाबको लेकर जो बवाल मचा हुआ है उसकी असल वजह कुछ और नही सिर्फ और सिर्फ औरतोंको बेपर्दा करना है । औरतोंको सरेआम बाजारोंमे जलील करना असल मकसद है ।


एक सवाल उन्हीं लोगोंसे पूछता हूं जो कहते हैं ये हिजाब देसमें बैन होना चाहिए । क्या ये लोग अपने बीवी और बेटियोंको बगैर दुपट्टेके बाजारमे जाने देंगे ? और जब आवारा लड़के बेटियोंको छेडेंगे और उनपे तंज करेगें तो क्या ये लोग खामोश रह सकेंगे ? कभी नही ।


ऐसे दोगले प्रवृत्तिके लोग जो अपने लिए तो अच्छा चाहते हैं और दुसरोंके लिए बुरा, असलमें ये लोग सभ्य समाज केलिए बीमारी हैं । कोढ़ जैसा रोग जो देखने और सुनने में ही घिनौना आभास होता है । 

औरत सहेजकर मर्यादा और इज्जतके साथ रखनेकी जात है । जितनी कष्ट और पीड़ा औरतोंको सहना पड़ा है शायद ही किसी और को सहना पड़ा हो ।

आज हम शायद ये भूल रहे हैं के जिन महिलाओंको बेनकाब करना चाह रहे हैं वे हमारी माताएं, बहनें और बेटियां भी हैं । हम चाहे जिस भी धर्म और रीत को मानने वाले हों, अपनी मां, बहन, बेटी या पत्निको युरोप और अमेरिकाके बरहना औरतकी तरह देखना पसंद नहीं करेंगे । 


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