मेरा हौसला
हां गिरते रहेंगे और उठते रहेंगे
जिस तरह एक चींटी नही थकती
अपनी रोजमर्रा की जहमतसे, कसरतसे
मेरा हौसला भी खुदा बढ़ाता है ।
अब वक्त है कुछ करने की
अपनी ज़िद पे अड़ने की
हद से आगे गुजरने की
अगर सच्चा रहूं, पक्का रहूं
तो मजबूर होगी दुनिया कदमों में झुकनेको ।
बातें बहुत सी हैं
कुछ सच्ची भी, कुछ झूठी भी
मैं सचकी बात करता हूं, वो हैं.....
हौसला, मेहनत, मोहब्बत और उम्मीद
मेरी उम्मीद मेरा हौसला है
मेरी मेहनत मेरी तक़दीर है
मेरी मोहब्बत मुझे एक उम्मीद देता है
कोई शक नही मुझे मंजिल पाने में
ये बात सच है
और मेरा रब इसे पूरा करेगा
मैं गिरता हूं, उठता हूं
क्योंकि मेरा हौसला खुदा बढ़ाता है ।
Labels: Hindi poetry, मेरा हौसला, हिंदी कविता


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