Thursday, March 10, 2022

तुझे जागता हुआ इंसान बनाते हैं


चलो फिर तुझे एक आवाज़ सुनाते हैं

कहा दिलने फिर एक ख्वाब दिखाते हैं

टुटे हुए सपनोको जोड़कर पंख लगाते हैं

चलो फिर तुझे एक परवाज़ कराते हैं।


कब तलक जिन्दगीको दूर से देख कर

अफसोस करोगे  जलोगे अंदर ही अंदर

कब तलक उम्मीद में खड़े रहोगे बुत की तरह 

चलो तुझे जागता हुआ इंसान बनाते हैं।


संग टकराएगी तो आवाज़ भी आएगी 

एक आवाज़ की खातिर हर संग टकराते हैं 

बांध मुट्ठी, हौसला कर और संग उठा 

चलो इस आवाज़ से एक साज़ बनाते हैं ।


क्या देखना है, क्या बेहतर है तेरे लिए

जो है, यही चाहता था? बेहतर है तेरे लिए ?

क़दम बढ़ा गर झूठ है, इसपे लानत भेज

ढा कर इस दीवार को फिर नया दीवार बनाते हैं ।



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