होके रानी भी तेरे ठोकरोंमें पड़ी रहती हूं मैं ( नज़्म )
खता कैसी है के ज़ुल्म ही ज़ुल्म सहती हूं मैं
होके रानी भी तेरे ठोकरोंमें पड़ी रहती हूं मैं
तुम मुझे चाहकर भी आजाद नहीं होने देते
तेरी मर्ज़ीसे बदलती हूं, जीती हूं, मरती हूं मैं
दिन-रात तेरी खिदमतमें लगी रहती हूं मैं
बनके साया तेरे साथ हमराह चलती हूं मैं
किस मिट्टीके हो तुम जो मोम होने नही देता
मैं पिघलती हूं, आसुओंमें बहती रहती हूं मैं
तुझको, तेरी आधी दुनियां, पूरी करती हूं मैं
तेरी खुशियोंमें हंसती हूं, तेरे ग़ममें रोती हूं मैं
मुमताज़, कभी हीर, कभी साेनी बनती हूं मैं
फक़त तेरे लिए बिखरती,संवरती, सजती हूं मैं
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| Super Success Ke Golden Rules : Hindi Translation of International Bestseller “Golden Rules by Napoleon Hill” |
मेरे ख्वाबमें क्यूं अपनी रंग भर नहीं सकते ?
मैं जो करती हुं, क्या तुम सब कर नही सकते ?
जानेमन तेरी हर मर्ज़में बिनते-तबीब बनती हूं मैं
तेरे गुस्से से डरती हुं, और प्यारभी करती हूं मैं
छोड़कर जाती नहीं, के बिखर जाओगे तुम
डर लगा रहता है ये कब बदल जाओगे तुम
आग उठाना पड़े, एकबार उफ्फ नही करती
बेअसर होके तंज ओ ताना से सब्र करती हूं मैं
Labels: Hindi poetry




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