मैं ख्वाबोंकी दुनियांमें आया नही था
मैं ख्वाबोंकी दुनियांमें आया नही था
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उमर भर का वादा कहां था तुझसे
नया नया रिश्ता बना था तुझसे
तु मुझसे वफ़ा का भरम ले रहे थे
ये लफ्ज़ पहली दफा मैं सुना था तुझसे
तुम साथ जीने मरने की कसम दे रहे थे
मुझको नई रीत नई रसम दे रहे थे
मैं ख्वाबोंकी दुनियांमें आया नही था
तुम हर एक कसमकी कसम दे रहे थे
मैं मुहब्बतके नाम से ना-आशना था
तुम मुहब्बतके सब गुन गा रहे थे
मुहब्बतकी सदियों पुरानी कहानी
था एक राजा और थी एक रानी
तुम कहानी की लड़ियां पिरोते पिरोते
मुझे अनजान रस्ते पे ले जा रहे थे
इस आगाज़का क्या अंजाम होगा
न सोंचा था खुदसे, न पूछा था तुझसे
उमर भर का वादा कहां था तुझसे….
ये रस्मों की दुनियां, ये कस्मों की दुनियां
वहशत भरी है मदमस्तों की दुनियां
लो, मुकम्मल से अब ना-मुकम्मल हुआ मैं
यही सोंचता हूं, क्यूं मिला था तुझसे
उमर भर का वादा कहां था तुझसे
(Poetry By : MD Hasanain Mansuri)



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